Sunday, March 6, 2011

आज फिर

कुछ यु आज हल्की सी मुस्कान है आई
आज फिर वैसी ही मस्ती है छाई
बहुत दिनों बाद हुआ है ये अहसास कि
कुछ अच्हा शायद ये ज़िन्दगी है लायी
आज फिर हवा कुछ कहने लगी है
धुप मे भी ठंडक होने लगी है
आसमा फिर हंसने लगा है
और धरती मुस्कुरानी लगी है
नया तो कुछ हुआ भी नहीं
फिर ये दुनिया लग रही नयी नयी
शायद थोड़ी सी सोच है बदली
की ज़िन्दगी को देखने की नज़र है बदली
लगता तो है मुझको येही
सोच हो जैसी जिंदगी है वैसी
बस मेहसूस करो हर पल खुशी
ये ज़िन्दगी रहेगी सदा मुस्‍कुराती हुई